Six US Tech Giants Company and Its CEOs and इंडियंस के CEOs बनने के कारण हिंदी में।

नमस्कार दोस्तों Stripe के CEO Patrick Collison का एक ट्वीट वायरल हो रहा है जिसमे उन्होने कहा था कि अमेरिका की टॉप 6 टेक gaints को Indian-origin CEOs. के द्वारा लीड किया जा रहा है।

Google, Microsoft, Adobe, IBM, Palo Alto Networks और अब Twitter को इंडियन origin CEOs के द्वारा लीड किया जा रहा है। उन्होने ये भी कहा कि मै इंडियंस की टेक्नोलॉजी में अदभुत success को देख कर आश्चर्य चकित हूँ। और अमेरिका immigrants को बहुत अधिक support भी करता है।

इस ट्वीट के उत्तर में टेस्ला के मालिक Elon Musk ने कहा कि Indian टैलेंट्स से अमेरिका को बहुत जयादा फायदा हुआ है।

इस पोस्ट में हम जानेंगे कि क्या कारण है की इंडियंस आज दुनिया के सबसे बड़े कंपनियों को चला रहे है।

Six US Tech Giants Company and Its CEOs (छह यूएस टेक जायंट्स कंपनी और उसके सीईओ)

Google के CEO है सुंदर पिचाई, Microsoft के CEO का नाम है सत्य नडेला, Adobe के CEO का नाम है शांतनु नारायण, IBM के CEO का नाम है Arvind Krishna, Palo Alto Networks के CEO का नाम है Nikesh Arora और Twitter के CEO का नाम है Parag Agrawal

दुनिया के टॉप कंपनी में भारतीयों के CEO होने का क्या कारण है? (What is the reason for Indians being CEOs in the world's top companies?)

दुनिया के टॉप कंपनी में भारतीयों के CEO होने का एक main कारण है indians का English Language Skill.
Indians आसानी से एक्सेंट के हिसाब से अपनी इंग्लिश improve कर लेते है जिससे ये आसानी से अमेरिकन कॉर्पोरेट में अपने विचारो को रख पाते है।

दूसरे देशो के लोगो को खास कर के चीन के लोगो को इंग्लिश language के कारण काफी समस्याए होती है।

दुनिया के टॉप कंपनी में भारतीयों के CEO होने का एक और मुख्य कारण है इंडियंस का धीरज और कंपनी के प्रति वफादारी।

इंडियन ज्यादातर एक ही कंपनी में लम्बे टाइम तक जुड़े रहते है और वो चीनी और रूस के लोगो की तरह जल्दी अपनी जॉब नहीं चेंज करते जबकि CEO बनने के लिए candidate को कंपनी का अच्छा खाशा अनुभव होना चाहिए। इसलिए इंडियंस ज्यादातर अमेरिकन कंपनी में CEOs बनते है।

भारतीयों के CEOs बनने का एक और प्रमुख कारण है Easier Adoption. इंडियंस बहुत जल्दी किसी भी कल्चर में घुल मिल जाते है और परिस्थिति के हिसाब से अपने को ढाल भी लेते है जबकि दूसरे देशो के लोगो को इसमें बहुत ज्यादा कठिनाईओं का सामना करना पड़ता है।

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